एलडीए) में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई में शनिवार एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। विजिलेंस टीम ने एलडीए के एक सुपरवाइजर को कथित तौर पर साढ़े सात लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। शुरुआती पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए एक अवर अभियंता (जेई) और स्मारक से जुड़े एक अन्य सुपरवाइजर को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई। फिलहाल तीनों से मामले के विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ जारी है।
यह कार्रवाई विजिलेंस के पुलिस महानिरीक्षक मंजिल सैनी के नेतृत्व में की गई। अधिकारियों के अनुसार मामले में विस्तृत जांच जारी है और रिश्वत के कथित लेनदेन से जुड़ी पूरी श्रृंखला की पड़ताल की जा रही है। विस्तृत आधिकारिक बयान और प्राथमिकी सामने आने के बाद आरोपों और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
सूत्रों के अनुसार विजिलेंस को रिश्वत मांगने की शिकायत मिली थी। शिकायत के सत्यापन के बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की और कथित लेनदेन पर नजर रखी। तय योजना के अनुसार सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश को कथित रूप से साढ़े सात लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने मौके पर ही उससे पूछताछ शुरू की, जिसके दौरान जांच को आगे बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।
जांच के दौरान आरोप है कि रकम मिलने के बाद चंद्र प्रकाश ने एलडीए के अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा को फोन कर मौके पर बुलाया। विजिलेंस टीम ने उन्हें भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी।
अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ाया गया। इसके बाद स्मारक से जुड़े सुपरवाइजर अश्विनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों से अलग-अलग और आमने-सामने पूछताछ कर कथित रिश्वत प्रकरण में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
विजिलेंस टीम अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर रिश्वत की मांग किस कार्य के एवज में की गई थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस पूरे प्रकरण में किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका रही है या नहीं। अधिकारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
जांच एजेंसी रिश्वत की कथित रकम के स्रोत, मांग, लेनदेन और उसके वितरण से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इसके अलावा आरोपितों के मोबाइल फोन, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा सकती है।
जांच का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी है कि यह पता लगाया जा सके कि क्या आरोपितों की भूमिका इसी तरह के अन्य मामलों में भी रही है या यह मामला एक अलग घटना है। फिलहाल विजिलेंस की कार्रवाई के बाद तीनों आरोपितों से पूछताछ जारी है। मामले में विस्तृत आधिकारिक बयान और प्राथमिकी सामने आने के बाद रिश्वत के कथित लेनदेन, आरोपों की प्रकृति और आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति और स्पष्ट होगी।
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