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शादी का सपना दिखाकर राजस्थान-हरियाणा भेजी जाती थीं युवतियां, अंबेडकरनगर पुलिस ने ऐसे खोली मानव तस्करी गिरोह की परतें

सात आरोपी गिरफ्तार, एक अपहृत युवती सकुशल बरामद; फर्जी शादी, बदली हुई पहचान और लाखों रुपये के सौदे का पुलिस ने किया खुलासा
Bureau
Bureau News Desk
06 Jul 2026
07:08 PM
1 min read
शादी का सपना दिखाकर राजस्थान-हरियाणा भेजी जाती थीं युवतियां, अंबेडकरनगर पुलिस ने ऐसे खोली मानव तस्करी गिरोह की परतें
इमेज सोर्स - संवाददाता रवि दुबे
हाइलाइट्स
अंबेडकरनगर पुलिस ने अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का किया भंडाफोड़।
सात आरोपी गिरफ्तार, एक अपहृत युवती सकुशल बरामद।
शादी का झांसा देकर गरीब परिवारों की युवतियों को निशाना बनाने का आरोप।
फर्जी पहचान पत्र और फर्जी विवाह कर राजस्थान व हरियाणा ले जाने का आरोप।

उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिस पर गरीब और असहाय परिवारों की युवतियों को शादी का झांसा देकर राजस्थान और हरियाणा ले जाने तथा वहां उनका सौदा करने का आरोप है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अपहृत युवती को सकुशल बरामद किया गया है।

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर, अनाथ और असहाय परिवारों की युवतियों को बेहतर जीवन और अच्छे परिवार में विवाह का भरोसा दिलाकर अपने जाल में फंसाता था। इसके बाद उन्हें दूसरे राज्यों में ले जाकर उनकी इच्छा के विरुद्ध देह व्यापार में धकेले जाने का आरोप है।

पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह के निर्देशन में अपराध नियंत्रण और महिला एवं बाल सुरक्षा अभियान के तहत एएचटी, स्वाट, सर्विलांस और अकबरपुर कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम को सोमवार को सूचना मिली कि कुछ लोग बसखारी मार्ग स्थित खिद्दिरपुर के पास एक युवती को राजस्थान ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके की घेराबंदी की और सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान एक अपहृत युवती को भी सुरक्षित मुक्त कराया गया।

पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह पहले ऐसे परिवारों की पहचान करता था जो आर्थिक रूप से कमजोर हों या जहां सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का अभाव हो। इसके बाद युवतियों और उनके परिजनों को अच्छे और संपन्न परिवार में विवाह कराने का भरोसा दिया जाता था।

विश्वास जीतने के बाद युवतियों को उत्तर प्रदेश से बाहर ले जाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह युवतियों के नाम बदलकर उनके फर्जी पहचान पत्र तैयार करता था ताकि उनकी वास्तविक पहचान छिपाई जा सके।

पुलिस के अनुसार, गिरोह केवल युवतियों को ले जाने तक सीमित नहीं था, बल्कि कथित तौर पर फर्जी विवाह का पूरा नाटक भी रचता था। गिरोह के सदस्य ही दूल्हा, बाराती और रिश्तेदार बनकर विवाह की रस्में पूरी करते थे ताकि किसी को संदेह न हो।

फर्जी विवाह के बाद युवती को विदाई के बहाने राजस्थान या हरियाणा ले जाया जाता था। पुलिस का आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध देह व्यापार में धकेल दिया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि यात्रा के दौरान गिरोह की एक महिला सदस्य युवती के साथ रहती थी। पुलिस के अनुसार, ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि रास्ते में किसी जांच या पूछताछ की स्थिति में पूरा मामला सामान्य वैवाहिक विदाई जैसा दिखाई दे और किसी को संदेह न हो।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुलिस को बताया कि राजस्थान में एक युवती के बदले करीब दो लाख रुपये तक लिए जाते थे। पुलिस ने आरोपी ऊषा के कब्जे से 40 हजार रुपये नकद भी बरामद किए हैं। बरामद धनराशि के संबंध में भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। फरार आरोपियों की तलाश के साथ-साथ गिरोह के आर्थिक नेटवर्क, अन्य राज्यों में सक्रिय सहयोगियों और संभावित पीड़ितों के संबंध में भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह कितने समय से सक्रिय था और अब तक कितनी युवतियों को इस तरीके से निशाना बनाया गया।

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