एक इमारत में लगी आग ने 15 परिवारों की दुनिया बदल दी। लेकिन जैसे-जैसे हादसे की परतें खुल रही हैं, कहानी सिर्फ आग तक सीमित नहीं दिखाई दे रही। 15 छात्रों की मौत के बाद अब सवाल उस इमारत, उसकी मंजूरी, निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार लोगों तक पहुंच चुके हैं। सरकारी कार्रवाई शुरू हो चुकी है, गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच एजेंसियां अब उस पूरी श्रृंखला को खंगाल रही हैं, जिसके बीच यह हादसा हुआ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में देर रात हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद एसआईटी गठित करने का फैसला लिया गया। साथ ही प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाए गए चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इनमें बिजली विभाग, फायर विभाग और एलडीए से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के एडीजी प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। जांच दल सात दिनों में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगा।
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अलीगंज थाने में छह नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें शामिल हैं:-
- बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला
- पेट शॉप संचालक रामकृष्ण उपाध्याय
- एनीमेशन सेंटर संचालक तूशॉक कृष्णा जायसवाल
- किरायेदार सुरेश कुमार शाहू
वहीं, नामजद आरोपी धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला की तलाश जारी है। संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था बबलू कुमार के मुताबिक मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

वीरेंद्र शुक्ला
जांच में सामने आया है कि जिस बिल्डिंग में हादसा हुआ, उसका मानचित्र आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत कराया गया था। लेकिन बाद में उसका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाने लगा। इमारत में पेट शॉप, वेयरहाउस, गेमिंग जोन, थ्री-डी एनीमेशन सेंटर और कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे थे। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आग से बचाव के लिए आवश्यक मानकों का पालन नहीं किया गया था। सेटबैक नहीं छोड़ा गया था और सुरक्षा उपाय भी पर्याप्त नहीं थे।
एलडीए रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2014 में नामांतरण के बाद बिल्डिंग मालिकों ने स्वयं मानचित्र पास कराने की योजना के तहत आवेदन किया था। दस्तावेजों में यह बताया गया था कि इमारत का उपयोग आवासीय उद्देश्य के लिए किया जाएगा। लेकिन जांच में सामने आया कि बाद में इसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए होने लगा। अब यह जांच की जा रही है कि आवासीय स्वीकृति के बावजूद यह परिवर्तन कैसे हुआ और वर्षों तक निगरानी व्यवस्था क्यों सक्रिय नहीं हुई।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में एलडीए के करीब 16 इंजीनियरों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि वर्ष 2014 के बाद से इस क्षेत्र की निगरानी किन अधिकारियों के जिम्मे रही और अवैध गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। एलडीए ने पांच सदस्यीय जांच समिति का भी गठन किया है। समिति तीन दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी।
पुलिस के अनुसार, दोपहर करीब ढाई बजे पहली मंजिल पर स्थित वेयरहाउस में आग लगने की घटना हुई। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। दूसरी और तीसरी मंजिल पर मौजूद छात्र अंदर फंस गए। पुलिस, दमकल और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आग तेजी से फैल चुकी थी। करीब दो घंटे तक चले बचाव अभियान के दौरान 15 शव बाहर निकाले गए। कई छात्र गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि जान बचाने के प्रयास में बिल्डिंग से कूदने वाले नौ छात्र घायल हुए।
मामले से जुड़े सह-मालिक सुरेंद्र शुक्ला का नाम भी चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, सुरेंद्र शुक्ला का नाम पहले पीएमटी पेपर लीक मामले में भी सामने आया था। उस मामले में एसटीएफ ने मुकदमा दर्ज किया था, हालांकि बाद में वह सबूतों के अभाव में बरी हो गए थे। उनका नाम रामेश्वरम इंस्टीट्यूट से भी जुड़ा बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
इस हादसे के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए?
- एसआईटी का गठन
- चार अधिकारियों का निलंबन
- छह लोगों के खिलाफ एफआईआर
- चार आरोपियों की गिरफ्तारी
- एलडीए की पांच सदस्यीय समिति का गठन
- अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच
क्या हुआ था अब तक?
दोपहर करीब 2:30 बजे
वेयरहाउस में आग लगने की सूचना मिली।
कुछ ही मिनटों में
आग पूरी बिल्डिंग में फैल गई।
राहत और बचाव अभियान शुरू
पुलिस, दमकल और एसडीआरएफ मौके पर पहुंची।
करीब दो घंटे बाद
15 शव निकाले गए और कई घायलों को अस्पताल भेजा गया।
देर रात
मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय बैठक हुई।
उसके बाद
एसआईटी गठित हुई, चार अधिकारियों को निलंबित किया गया और चार लोगों की गिरफ्तारी हुई।
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