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EXCLUSIVE | लखनऊ STF एनकाउंटर में खत्म हुआ 'एक लाख का इनामी' संजीव: संदीप सिंह हत्याकांड से लेकर 15 साल के अपराध सफर तक, पढ़िए पूरी इनसाइड स्टोरी

EXCLUSIVE Ground Report: लखनऊ STF एनकाउंटर में मारे गए ₹1 लाख के इनामी संजीव की पूरी कहानी। संदीप सिंह हत्याकांड, 15 साल का आपराधिक रिकॉर्ड, अंबेडकरनगर के गांव से ग्राउंड रिपोर्ट और पुलिस कार्रवाई की पूरी जानकारी।
Bureau
Bureau News Desk
27 Jun 2026
12:00 PM
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EXCLUSIVE | लखनऊ STF एनकाउंटर में खत्म हुआ 'एक लाख का इनामी' संजीव: संदीप सिंह हत्याकांड से लेकर 15 साल के अपराध सफर तक, पढ़िए पूरी इनसाइड स्टोरी
NDV TODAY EXCLUSIVE | लखनऊ संवाददाता प्रदीप यादव, अंबेडकरनगर संवाददाता रवि दुबे, और लखनऊ ब्यूरो
हाइलाइट्स
• लखनऊ STF और पुलिस की कार्रवाई में ₹1 लाख का इनामी संजीव मारा गया।
• पुलिस के अनुसार वह संदीप सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी था।
• घटना के बाद NDV TODAY की टीम आरोपी के गांव पहुंची।
• ग्राउंड रिपोर्ट में परिवार और ग्रामीणों से जुड़ी कई जानकारियां सामने आईं।

करीब एक महीने पहले लखनऊ के चर्चित बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया था। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस कथित शूटर तक पहुंचना थी, जिसकी तलाश में कई जिलों की पुलिस और एसटीएफ लगातार अभियान चला रही थी। आखिरकार शनिवार को यह तलाश खत्म हुई, जब लखनऊ के इंदिरा कैनाल रोड पर हुई मुठभेड़ में एक लाख रुपये के इनामी संजय उर्फ संजीव की मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार, संजीव वही आरोपी था जिसकी तलाश संदीप सिंह हत्याकांड में की जा रही थी। घटना के बाद से वह लगातार फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

लेकिन यह कहानी केवल एक एनकाउंटर की नहीं है। यह उस शख्स के करीब 15 साल लंबे आपराधिक सफर की भी कहानी है, जो अंबेडकरनगर के एक छोटे से गांव से निकलकर पूर्वांचल के कई जिलों में पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया।

पहले देखे ये तस्वीरें: 

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इंदिरा कैनाल रोड पर कैसे खत्म हुआ फरारी का सफर? पुलिस के अनुसार, 27 जून को अपराधियों की तलाश में चल रहे विशेष चेकिंग अभियान के दौरान इंदिरा कैनाल रोड पर पुलिस टीम की संजय उर्फ संजीव से मुठभेड़ हुई। पुलिस का कहना है कि घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी। घायल अवस्था में उसे तत्काल डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

एनडीवी टुडे संवाददाता प्रदीप यादव से क्या बोले दीपक सिंह एडिशनल एसपी

संदीप सिंह हत्याकांड के बाद पूरे सिस्टम की नजर इसी आरोपी पर थी: 27 मई 2026 को लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र में हुए बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड के बाद जांच एजेंसियों की नजर जिन नामों पर सबसे पहले गई, उनमें संजय उर्फ संजीव प्रमुख था। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान उसे इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी और कथित शूटर माना गया। इसके बाद लगातार उसकी तलाश की जा रही थी और पुलिस आयुक्त की ओर से उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। करीब एक महीने तक चली तलाश शनिवार को मुठभेड़ के साथ समाप्त हुई।

गांव पहुंची हमारी टीम, सामने आई परिवार की कहानी: एनडीवी टुडे के संवाददाता रवि दुबे जब अंबेडकरनगर के अहिरौली थाना क्षेत्र स्थित चककौडार गांव पहुंचे तो वहां माहौल पूरी तरह बदला हुआ था। गांव के लोगों के मुताबिक, संजीव पिछले कई वर्षों से गांव में बहुत कम दिखाई देता था। जेल से रिहा होने के बाद पिछले करीब तीन वर्षों में उसका गांव आना-जाना बढ़ा जरूर था, लेकिन वह अधिकतर समय गोसाईगंज क्षेत्र स्थित अपनी ससुराल में रहता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराध की दुनिया में उसकी सक्रियता भी इसी दौरान फिर बढ़ी।

करीब 15 साल पहले शुरू हुआ अपराध का सफर: परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, संजीव लगभग 15 वर्ष पहले अपराध की दुनिया में आया था। उसके खिलाफ हत्या, लूट और अन्य गंभीर धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हुए। ग्रामीणों का कहना है कि वह करीब 12 वर्ष तक जेल में भी रहा। हालांकि जेल से बाहर आने के बाद कुछ समय तक वह गांव में रहा, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ दर्ज मामलों के कारण उसकी गतिविधियां लगातार जांच के दायरे में बनी रहीं।

चार भाइयों में दूसरा, परिवार आज भी गांव में: ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि संजीव चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। उसके बड़े भाई सत्यजीत घोड़ा-बुग्गी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। तीसरे भाई पंजाब में रहते हैं, जबकि सबसे छोटे भाई गांव में मीट की दुकान चलाते हैं। पिता हरिराम लंबे समय से बीमार बताए जाते हैं। परिवार में उसकी पत्नी, तीन बेटे अमरेश, शिवा और राज तथा दो बेटियां ब्यूटी और सृष्टि हैं। एनकाउंटर की खबर पहुंचने के बाद परिवार और गांव में शोक का माहौल देखने को मिला।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संजीव के खिलाफ अंबेडकरनगर, अयोध्या, बस्ती समेत कई जिलों में हत्या और अन्य गंभीर अपराधों के मुकदमे दर्ज थे। पुलिस का यह भी कहना है कि उसकी गतिविधियों की जांच के दौरान उसका नाम कुख्यात अपराधियों और संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़े मामलों में भी सामने आया था।

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले से जुड़े सभी कानूनी प्रावधानों का पालन किया जा रहा है। संदीप सिंह हत्याकांड की जांच भी अपने निर्धारित कानूनी दायरे में आगे बढ़ेगी।

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