नई दिल्ली। वर्ष 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की नई जमानत याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत इस मामले में शनिवार को ही आदेश सुना सकती है। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रखने का निर्णय लिया।
सुनवाई के दौरान उमर खालिद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदिप ने अदालत के समक्ष दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने अंद्राबी मामले की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के संदर्भ में सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा पहले दिए गए उस निर्देश, जिसमें गवाहों के बयान दर्ज नहीं होने की स्थिति में एक वर्ष बाद दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने की बात कही गई थी, अब प्रभावी नहीं माना जाना चाहिए।
वहीं शरजील इमाम की ओर से पेश अधिवक्ता तालिब मुस्तफा ने कहा कि एक वर्ष तक नई जमानत याचिका दाखिल न करने की शर्त पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ विचार करने वाली है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि इसी मामले में कई अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए अदालत से कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ कोई नया आदेश जारी नहीं करती, तब तक पूर्व में दिया गया आदेश प्रभावी रहेगा। पुलिस ने यह भी तर्क दिया कि यदि आरोपियों को किसी प्रकार की राहत या आदेश में संशोधन चाहिए तो उन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए, क्योंकि ट्रायल कोर्ट इस संबंध में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
अदालत ने 13 जून को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। इसके बाद उमर खालिद और शरजील इमाम ने नई जमानत याचिकाएं दाखिल कीं। याचिकाओं में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी पिछली जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के लगभग छह महीने बाद भी मुकदमे की कार्यवाही में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। आरोपियों की ओर से यह भी कहा गया कि अब तक आरोप तय करने को लेकर बहस भी पूरी नहीं हो सकी है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पांच जनवरी को उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हालांकि उसी दिन अदालत ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, शादाब अहमद और मोहम्मद सलीम खान को जमानत प्रदान की थी।
इसके बाद 22 मई को खालिद सैफी और तसलीम अहमद को छह महीने की अंतरिम जमानत भी दी गई। इससे पहले सफूरा जरगर, आसिफ इकबाल तान्हा, देवांगना कलीता और नताशा नरवाल सहित कई अन्य सह-आरोपियों को भी विभिन्न चरणों में अदालतों से राहत मिल चुकी है।
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