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करोड़ों की मशीनें रहीं खड़ी, गंदे नाले में उतारे गए सफाईकर्मी; बारिश के बाद हापुड़ पालिका पर उठे सवाल

24 घंटे की मूसलाधार बारिश के बाद शहर में जलभराव, बिना हेलमेट, दस्ताने और सुरक्षा बेल्ट के नालों की सफाई कराते दिखे कर्मचारी; ईओ ने नालों में कूड़ा और पॉलिथीन फंसने को बताया वजह
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Bureau News Desk
10 Jul 2026
06:30 PM
1 min read
करोड़ों की मशीनें रहीं खड़ी, गंदे नाले में उतारे गए सफाईकर्मी; बारिश के बाद हापुड़ पालिका पर उठे सवाल
सोर्स - अर्पिता गुप्ता
हाइलाइट्स
24 घंटे की बारिश के बाद हापुड़ के कई इलाकों में हुआ जलभराव।
अतरपुरा क्षेत्र में सफाईकर्मी बिना सुरक्षा उपकरण के नालों में उतरे।
करोड़ों रुपये की सफाई मशीनों के उपयोग पर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल।
नगर पालिका ने नालों में पॉलिथीन और कूड़ा जमा होने को बताया जलभराव की वजह।

हापुड़। लगातार 24 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद हापुड़ शहर की जलनिकासी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई। शहर के प्रमुख बाजारों, मुख्य सड़कों और कई आवासीय इलाकों में जलभराव होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात बिगड़ने और लोगों के विरोध के बाद नगर पालिका प्रशासन सक्रिय हुआ, लेकिन राहत कार्यों के दौरान सामने आई तस्वीरों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया।

अतरपुरा क्षेत्र में नालों की सफाई के दौरान सफाईकर्मियों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के गंदे और गहरे नालों में उतरकर काम करते देखा गया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों के पास न हेलमेट था, न सुरक्षा बेल्ट, न दस्ताने और न ही अन्य आवश्यक सुरक्षा संसाधन। यह सब उस समय हुआ जब नगर पालिका के अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे और सफाई कार्य की निगरानी कर रहे थे।

लगातार हुई बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया। बाजारों में दुकानों के बाहर पानी जमा होने से व्यापार प्रभावित हुआ, जबकि राहगीरों और वाहन चालकों को आवाजाही में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बारिश से पहले नालों और नालियों की समय पर सफाई कराई जाती तो इतनी गंभीर जलभराव की स्थिति पैदा नहीं होती।

स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि नालों की सफाई के लिए करोड़ों रुपये की आधुनिक मशीनें खरीदी गई हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर उनका उपयोग नहीं किया गया। इसके बजाय सफाईकर्मियों को सीधे गहरे और गंदे नालों में उतारकर सफाई कराई गई। लोगों का कहना है कि यदि मशीनें उपलब्ध हैं तो ऐसे जोखिमपूर्ण कार्य में उनका इस्तेमाल प्राथमिकता से होना चाहिए, ताकि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार नालों की सफाई के दौरान जहरीली गैस, फिसलन, करंट और डूबने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे कार्यों में सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अत्यंत आवश्यक माना जाता है। अतरपुरा क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या सफाई कार्य के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया।

बारिश के बाद शहर में जलनिकासी व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई दी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि मानसून से पहले नालों की नियमित सफाई और मशीनों का प्रभावी उपयोग किया जाता तो शहर को जलभराव की समस्या का कम सामना करना पड़ता। कई लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनने के लिए ठोस व्यवस्था करने की मांग की।

नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संजय मिश्रा ने कहा कि शहर में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त किया गया है, लेकिन बारिश के दौरान नालों में जगह-जगह रुकावट आने से जलनिकासी प्रभावित हुई। उनके अनुसार सफाई के दौरान नालों से बड़ी मात्रा में पॉलिथीन, बोरियां और अन्य कूड़ा निकला, जिससे पानी का बहाव रुक गया।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि घरेलू कूड़ा नालियों में न डालें और नगर पालिका की कूड़ा संग्रहण व्यवस्था का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि जलभराव की समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और जल्द ही लोगों को राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

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