आगामी मानसून सत्र से पहले पुरानी पेंशन योजना को लेकर एक बार फिर बहस तेज होती दिखाई दे रही है। सामाजिक कार्यकर्ता और कर्मचारियों एवं श्रमिकों के मुद्दों को उठाने वाले जॉय बनर्जी ने केंद्र सरकार से आगामी संसद सत्र में सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की है। उन्होंने इसके साथ ही नई पेंशन योजना को समाप्त कर देशभर में गारंटीड पेंशन व्यवस्था लागू करने का भी आग्रह किया।
जॉय बनर्जी ने जारी बयान में कहा कि लंबे समय से सरकारी कर्मचारी और श्रमिक संगठन पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग करते रहे हैं। उनके अनुसार, कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस विषय पर नीति स्तर पर निर्णय लिया जाना आवश्यक है।
अपने बयान में जॉय बनर्जी ने सरकार से अपील की कि आगामी मानसून सत्र में कर्मचारियों की पेंशन से जुड़े मुद्दे पर निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांग पर सकारात्मक विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि देशभर में 'एक देश, एक पेंशन' की अवधारणा पर विचार करते हुए सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए गारंटीड पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाए।
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जॉय बनर्जी ने अपने बयान में सांसदों और विधायकों को मिलने वाली पेंशन व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए पेंशन की व्यवस्था बनी हुई है, तो लंबे समय तक सरकारी सेवा देने वाले कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था पर भी समान रूप से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार से सांसदों और विधायकों की पेंशन व्यवस्था की समीक्षा करने और कर्मचारियों की मांगों के संदर्भ में आवश्यक निर्णय लेने की अपील की।
"जब एक बार विधायक या सांसद बनने पर जीवनभर की पेंशन सुरक्षित हो सकती है, तो तीस-तीस साल तक देश की सेवा करने वाले राष्ट्र निर्माता कर्मचारियों के बुढ़ापे की लाठी क्यों छीनी जा रही है? यह कैसा न्याय है?" — जॉय बनर्जी
जॉय बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि वर्तमान नई पेंशन योजना बाजार आधारित व्यवस्था पर आधारित है। उन्होंने सरकार से इसे समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग दोहराई। उनके अनुसार, कर्मचारियों के भविष्य को देखते हुए गारंटीड पेंशन व्यवस्था अधिक उपयुक्त होगी।
अपने बयान के अंत में जॉय बनर्जी ने कर्मचारियों और श्रमिकों से इस मुद्दे पर एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों से जुड़े विषयों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के समक्ष लगातार उठाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कर्मचारियों की मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो कर्मचारी और श्रमिक अपनी आवाज उठाना जारी रखेंगे।
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