लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद शुरू हुई जांच अब सिर्फ एक इमारत तक सीमित नहीं रह गई है। मुख्यमंत्री को सौंपी गई रिपोर्ट ने कई पुराने रिकॉर्ड, अवैध निर्माण और लंबित कार्रवाई से जुड़े ऐसे पहलुओं की ओर ध्यान खींचा है, जिनकी चर्चा अब प्रशासनिक हलकों में भी हो रही है। इसी जांच के दौरान कई साल पुराने निर्माणों और विभिन्न क्षेत्रों में हुई कार्रवाई का ब्योरा भी सामने आया।
अलीगंज अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनवरी से 20 जून तक अवैध निर्माणों पर हुई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा। इसके बाद तैयार की गई रिपोर्ट में कई ऐसे मामलों का उल्लेख सामने आया, जिनमें आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण से जुड़े तथ्य दर्ज किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार गोमतीनगर, आशियाना, कानपुर रोड समेत विभिन्न इलाकों में 1043 आवासीय भूखंडों और भवनों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इनमें से कई मामलों में शमन के लिए नोटिस भेजे गए थे, लेकिन सीमित संख्या में लोगों ने ही प्रक्रिया पूरी करने के लिए संपर्क किया।
विहित न्यायालय में लगभग दो हजार निर्माणों के ध्वस्तीकरण के आदेश पारित किए जा चुके हैं। इनमें गोमतीनगर और चौक क्षेत्र के मामले प्रमुख बताए गए हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई मामलों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।
पिछले वर्ष बिना मानचित्र स्वीकृति के बने 83 अपार्टमेंटों को चिन्हित किया गया था। इनके खिलाफ नोटिस जारी किए गए थे और कुछ मामलों में पहले भी ध्वस्तीकरण आदेश दिए जा चुके थे। आंतरिक जांच समिति को संबंधित क्षेत्र में तैनात कुछ अवर अभियंताओं और सुपरवाइजरों की तैनाती से जुड़ा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद रिकॉर्ड संरक्षित रखने के संबंध में नए निर्देश जारी किए गए हैं।
रिपोर्ट में कुछ पुराने मामलों और पूर्व में हुई जांचों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें होटल अग्निकांडों और पूर्व में तैयार की गई जांच रिपोर्टों का संदर्भ शामिल है। अलीगंज अग्निकांड के बाद शुरू हुई कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया अभी जारी है। विभिन्न मामलों में रिकॉर्ड की समीक्षा, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और पूर्व में हुई कार्रवाई का परीक्षण भी किया जा रहा है।
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