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सपनों के घर के नाम पर बड़ा खेल - सरकारी जमीन पर बसा दी जा रही कॉलोनियां

NDV Today की पड़ताल में चिनहट तहसील के कई इलाकों में सरकारी भूमि करवाए जा रहे धड़ल्ले से कब्जे।
Bureau
Bureau News Desk
02 Jul 2026
05:38 PM
1 min read
सपनों के घर के नाम पर बड़ा खेल - सरकारी जमीन पर बसा दी जा रही कॉलोनियां
लखनऊ में सरकारी भूमि पर कथित अवैध प्लॉटिंग को लेकर NDV Today की विशेष रिपोर्ट
हाइलाइट्स
NDV Today की पड़ताल में सरकारी भूमि पर कथित अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनियां विकसित किए जाने के आरोप सामने आए।
आरोप है कि कुछ मामलों में खरीदारों को रजिस्ट्री निजी भूमि की कराई जाती है, जबकि कब्जा दूसरी सरकारी भूमि पर दिलाया जाता है।
चिनहट तहसील के हरदासीखेड़ा, रहमानपुर-गणेशपुर, धांवा, लोलाई, नौबस्ता और अयोध्या रोड से जुड़े कुछ क्षेत्रों को लेकर सवाल उठे हैं।

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में अपने सपनों का घर खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण है। NDV Today की पड़ताल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कराकर कॉलोनियां बसाने और खरीदारों को गुमराह करने के आरोप सामने आए हैं। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

क्या है पूरा खेल?
पड़ताल के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में खरीदारों को जिस जमीन का कब्जा दिया जाता है, उसकी वास्तविक स्थिति और रजिस्ट्री में दर्ज गाटा संख्या में अंतर होने के आरोप हैं। आरोप है कि रजिस्ट्री निजी भूमि की कराई जाती है, जबकि कब्जा सरकारी भूमि पर दिलाया जाता है। खरीदार वर्षों तक इसे अपनी वैध संपत्ति समझकर मकान बनाते रहते हैं, लेकिन बाद में सरकारी कार्रवाई होने पर सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं को उठाना पड़ता है।

पहले देखें तस्वीरें जहा हो रहा है ये खेल:

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किन क्षेत्रों पर उठ रहे हैं सवाल?
स्थानीय लोगों और दस्तावेजों के आधार पर चिनहट तहसील के हरदासीखेड़ा, रहमानपुर-गणेशपुर, धांवा, लोलाई, नौबस्ता और अयोध्या रोड से जुड़े कुछ क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और कॉलोनियां विकसित किए जाने के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसियों द्वारा किया जाना शेष है।

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सरकारी जमीन पर कैसे बस रही हैं बस्तियां?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भूमि सरकारी है तो वहां सड़कें, प्लॉटिंग, बिजली, पानी और भवन निर्माण कैसे हो रहा है? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं? यह ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर प्रशासनिक जांच से ही सामने आ सकता है।

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क्या विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते राजस्व विभाग, नगर निगम, विकास प्राधिकरण, सिंचाई विभाग और पुलिस प्रभावी कार्रवाई करें तो इस तरह की अवैध कॉलोनियों को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सकता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सबसे बड़ा नुकसान किसका?
इस पूरे खेल में सबसे अधिक नुकसान उस आम व्यक्ति का होता है, जिसने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर परिवार के लिए एक घर खरीदा। जब वर्षों बाद पता चलता है कि जिस भूमि पर मकान बना है वह सरकारी है या विवादित है, तब कानूनी कार्रवाई का सामना खरीदार को करना पड़ता है, जबकि कथित रूप से फर्जीवाड़ा करने वाले लोग बच निकलते हैं।

NDV Today की अपील
यदि आपने भी चिनहट, सदर तहसील, अयोध्या रोड या आसपास के क्षेत्रों में प्लॉट या मकान खरीदा है और आपको गाटा संख्या, सीमांकन या कब्जे को लेकर कोई संदेह है, तो खरीद से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच अवश्य कराएं। भूमि का सीमांकन, खतौनी, नक्शा और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान कराना आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

जांच की मांग
सार्वजनिक हित को देखते हुए आवश्यक है कि संबंधित विभाग इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएं। यदि कहीं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा या फर्जीवाड़ा हुआ है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो, और यदि आरोप निराधार हैं तो तथ्य सार्वजनिक किए जाएं। इससे आम नागरिकों का विश्वास भी बना रहेगा और भविष्य में किसी निर्दोष खरीदार को नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

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