फीस वृद्धि विवाद में नया मोड़, निष्कासित छात्रों के समर्थन में उतरे पूर्व छात्र नेता

निष्कासित छात्रों के समर्थन में आंदोलन तेज, कई पूर्व छात्र नेताओं के धरने में शामिल होने की तैयारी।

 

लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। फीस वृद्धि के विरोध के बाद शैक्षिक अधिकार से वंचित किए गए तीन छात्र नेताओं के समर्थन में पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव सामने आए हैं। उन्होंने शनिवार को धरनारत छात्रों के समर्थन में अनशन शुरू किया और विश्वविद्यालय प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।

 

विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि को लेकर छात्रों द्वारा लगातार विरोध दर्ज कराया जा रहा है। इसी क्रम में कुछ छात्र नेताओं पर कार्रवाई की गई, जिसके बाद उन्हें शैक्षिक अधिकार से वंचित कर दिया गया। इस फैसले के विरोध में छात्र संगठनों और पूर्व छात्र नेताओं की सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है। पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव ने कहा कि फीस में एक साथ लगभग 50 से 100 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। उनके अनुसार ऐसी स्थिति में यदि छात्र नेता विरोध नहीं करते तो यह उनकी जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा होता।

 

 

रमेश श्रीवास्तव ने कहा कि छात्रों ने कुलपति से वार्ता का प्रयास किया था। उन्होंने बताया कि वार्ता के लिए इंतजार करने के बावजूद जब कुलपति कार्यालय से बाहर निकलने लगे तो कुछ छात्र नेता उनकी गाड़ी के सामने लेट गए और बातचीत की मांग करते हुए दरवाजे पर दस्तक दी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास बताया। उनके अनुसार इस घटना के आधार पर छात्रों को शिक्षा से वंचित करना उचित नहीं माना जा सकता।

 

पूर्व छात्र नेता ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुलपति विश्वविद्यालय के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर होने के साथ-साथ छात्रों के अभिभावक की भूमिका भी निभाते हैं। ऐसे में छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित होना आवश्यक है। उन्होंने फीस वृद्धि पर पुनर्विचार करने तथा छात्र नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई को वापस लेने की मांग भी की।

 

रमेश श्रीवास्तव ने बताया कि मंगलवार को कई अन्य पूर्व छात्र नेता भी धरने में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभी लोग कुलपति से बातचीत का प्रयास करेंगे और समाधान निकालने की दिशा में पहल करेंगे। इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय परिसर में चल रहा आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

 

पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है और इसका प्रभाव छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने फीस वृद्धि को प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के लिए चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है ताकि छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को सामने लाया जा सके।


 

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