साल 1978 में संभल में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद जिला छोड़ने को मजबूर हुए एक पीड़ित परिवार को लगभग 48 वर्ष बाद जमीन के पट्टे का पहला प्रमाण पत्र मिला है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई पुनर्वास प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, राम शरण दास रस्तोगी के परिवार को 100 वर्ग मीटर भूमि का पट्टा आवंटित किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, संभल के आलम सराय देहात गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर ने पट्टा प्रमाण पत्र सौंपा। इस अवसर पर मुरादाबाद मंडल के आयुक्त आंजनेय कुमार, जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक प्रार्थनाएं और वैदिक अनुष्ठान भी आयोजित किए गए।
प्रशासन के अनुसार, राम शरण दास रस्तोगी का परिवार वर्ष 1978 के दंगों के बाद भय और असुरक्षा के कारण 1979 में संभल छोड़कर चला गया था। तब से परिवार जिले से बाहर रह रहा था। अब सरकार द्वारा पुनर्वास की दिशा में उठाए गए कदम के तहत परिवार को भूमि आवंटित की गई है, जिससे उनके वापस बसने का रास्ता खुला है।
पट्टा प्रमाण पत्र वितरण के बाद सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दंगा प्रभावित परिवारों को नई शुरुआत का अवसर देना है। उन्होंने कहा, "यह दुखद है कि 1978 के दंगों के दौरान 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, उनके घर जला दिए गए और लोगों पर जुल्म किये गये। कई परिवारों को मजबूरन पलायन करना पड़ा। सरकार ने ऐसे परिवारों को 100 वर्ग मीटर की जमीन देने का फैसला किया है, ताकि वे वापस आकर अपना घर फिर से बना सकें।"
वर्तमान में दिल्ली में रहने वाले राम शरण दास रस्तोगी के पौत्र कपिल रस्तोगी ने बताया कि 29 मार्च 1978 को उनके दादा अपनी किराना दुकान पर मौजूद थे, जब वहां भीड़ पहुंची। कपिल रस्तोगी ने आरोप लगाया कि दुकान को लूटे जाने का विरोध करने पर उनके दादा पर हमला किया गया। उन्होंने कहा कि बाद में उनका शव एक कुएं में मिला था। कपिल के अनुसार, दंगों के बाद परिवार को लगातार धमकियां मिलती रहीं, जिसके चलते उन्हें 1979 में संभल छोड़ना पड़ा।
कपिल रस्तोगी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राज्य विधानसभा में 1978 के दंगों का मुद्दा उठाए जाने के बाद परिवार ने प्रशासन से संपर्क किया। इसके बाद पुनर्वास प्रक्रिया आगे बढ़ी। उन्होंने कहा, "48 साल के लंबे संघर्ष के बाद हमें न्याय मिला।" परिवार की सदस्य रुकमा रस्तोगी ने बताया कि दंगों के बाद मिली धमकियों के कारण उन्हें संभल छोड़ना पड़ा था। उन्होंने कहा, "हम वापस आकर यहीं अपना घर बनाना चाहते हैं। हम मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के आभारी हैं।"
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