उत्तर प्रदेश के वाराणसी में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। लगभग ₹400 करोड़ की लागत से तैयार किए जा रहे इस स्टेडियम का निर्माण कार्य 92 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार, यदि कार्य निर्धारित गति से जारी रहा तो सितंबर तक इसे पूरी तरह तैयार किए जाने की संभावना है।
यह स्टेडियम अपनी आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ अनूठी वास्तुकला के कारण भी चर्चा में है। काशी की सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए इसे भगवान शिव की थीम पर विकसित किया जा रहा है, जिससे यह देश के सबसे अलग और विशिष्ट क्रिकेट स्टेडियमों में शामिल हो सकता है।
स्टेडियम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी डिजाइन है। मीडिया सेंटर और नॉर्थ पवेलियन को भगवान शिव के डमरू के आकार में विकसित किया जा रहा है। मैदान की फ्लडलाइट्स त्रिशूल की आकृति में स्थापित की जा रही हैं, जबकि मुख्य प्रवेश द्वार बेलपत्र की थीम पर तैयार किया गया है। स्टेडियम की छत को अर्धचंद्र के स्वरूप में डिजाइन किया गया है, जिससे पूरी संरचना काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। यही विशेषताएं इसे पारंपरिक क्रिकेट स्टेडियमों से अलग पहचान देती हैं और वास्तुकला के लिहाज से भी इसे विशिष्ट बनाती हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किए जा रहे इस स्टेडियम में एक साथ लगभग 30 हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था होगी। मुख्य क्रिकेट मैदान के साथ खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए पूर्ण आकार का अलग प्रैक्टिस ग्राउंड भी बनाया गया है।
स्टेडियम में आधुनिक ड्रेसिंग रूम, अत्याधुनिक मीडिया सेंटर, ब्रॉडकास्ट सुविधाएं, नए पवेलियन, उन्नत सुरक्षा व्यवस्था और लगभग 1500 वाहनों की पार्किंग की सुविधा भी विकसित की जा रही है।
निर्माण एजेंसियों के अनुसार परियोजना का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। वर्तमान में अंतिम चरण के निर्माण और फिनिशिंग का काम जारी है। अधिकारियों का अनुमान है कि सितंबर तक स्टेडियम पूरी तरह तैयार हो सकता है।
इस परियोजना का निर्माण उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा अपनी संचित निधियों से कराया जा रहा है। परियोजना के लिए राज्य सरकार ने 90 वर्ष की अवधि के लिए भूमि लीज पर उपलब्ध कराई है। प्रशासनिक स्वीकृतियां और अन्य आवश्यक अनुमतियां भी समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई गईं, जिससे निर्माण कार्य निर्धारित गति से आगे बढ़ सका।
स्टेडियम के लिए आवश्यक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से परिसर के निकट नया विद्युत उपकेंद्र स्थापित किया गया। अधिकारियों के अनुसार, वाराणसी प्रशासन और संबंधित विभागों के समन्वय से लगभग चार महीने के भीतर बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पूरी कर ली गई, जिससे निर्माण कार्य की गति प्रभावित नहीं हुई।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि स्टेडियम तैयार होने के बाद यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों के आयोजन की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके साथ ही खेल पर्यटन, होटल उद्योग, परिवहन और स्थानीय व्यापार को भी इसका लाभ मिल सकता है।
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