>लखनऊ की सबसे बहुचर्चित और महात्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक सुशांत गोल्फ सिटी इन दिनों कानूनी उलझनों के चक्रव्यूह में फंसी हुई है। लेकिन आज, 20 मई, का दिन इस पूरे प्रोजेक्ट की दिशा और दशा तय करने वाला हो सकता है। राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) इस मामले में बड़ा फैसला सुना सकता है, जो न केवल अंसल ग्रुप की भूमिका को परिभाषित करेगा, बल्कि लाखों निवेशकों और शहर की भविष्य की योजना पर भी असर डालेगा।
>पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 24 फरवरी को NCLT ने अंसल प्रॉपर्टीज़ को एक फाइनेंस कंपनी की याचिका पर दिवालिया घोषित कर दिया। लेकिन इस प्रक्रिया में न तो लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और न ही आवास विकास परिषद को पक्षकार बनाया गया। LDA ने इस निर्णय को “एकतरफा और अधूरी सुनवाई पर आधारित” बताते हुए NCLAT का दरवाजा खटखटाया।
>NCLAT ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल LDA को पक्ष रखने की अनुमति दी, बल्कि 25 अप्रैल को सुनवाई के बाद NCLT के आदेश पर फिलहाल रोक भी लगा दी। अगली सुनवाई के लिए 20 मई की तारीख तय की गई, जो आज है। अब सभी की निगाहें NCLAT पर टिकी हैं।
>सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि जिस फाइनेंस कंपनी की 83 करोड़ की बकाया राशि पर यह दिवालियापन प्रक्रिया शुरू की गई, उसके सामने LDA का दावा कहीं ज़्यादा बड़ा है। LDA ने 4000 करोड़ रुपये की देनदारी का दावा किया है, जिसमें टाउनशिप की बंधक जमीन, मानचित्र शुल्क और सरकारी ज़मीन की लागत शामिल है। इतना बड़ा वित्तीय हित दांव पर होने के बावजूद पहले की प्रक्रिया में LDA को सुना ही नहीं गया।
>सूत्रों की मानें तो NCLAT आज अंसल को दिवालिया घोषित करने के आदेश पर पूर्ण रोक लगा सकता है और टाउनशिप के विकास की जिम्मेदारी किसी अन्य कंपनी को सौंपने का रास्ता भी खोल सकता है। यह फैसला न सिर्फ अंसल ग्रुप के लिए निर्णायक होगा, बल्कि हजारों निवेशकों और गृहस्वामियों के लिए भी उम्मीद की किरण बन सकता है, जो वर्षों से अपने आशियाने का सपना संजोए हुए हैं।
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