Thursday, 25 June 2026 | Lucknow | 29°C

8वें वेतन आयोग पर बड़ी बैठक, वेतन-पेंशन और पुरानी पेंशन योजना समेत कई मांगों पर चर्चा

कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक, वेतन, पेंशन, चिकित्सा सुविधा और प्रमोशन व्यवस्था पर कर्मचारी संगठनों ने उठाए कई मुद्दे।
Bureau
Bureau Senior Journalist
16 May 2026
06:25 PM
1 min read
408
8वें वेतन आयोग पर बड़ी बैठक, वेतन-पेंशन और पुरानी पेंशन योजना समेत कई मांगों पर चर्चा

 

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर 8वें वेतन आयोग के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें वेतन संरचना, पेंशन व्यवस्था, भत्तों, प्रमोशन नीति और चिकित्सा सुविधाओं सहित कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के बीच नई उम्मीदें जगी हैं।

 

11 मई 2026 को राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्श तंत्र की 49वीं बैठक कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने विभिन्न मांगों और प्रशासनिक विषयों पर विचार-विमर्श किया। बैठक में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, व्यय सचिव, कार्मिक सचिव, डाक विभाग सचिव, शिक्षा सचिव और स्वास्थ्य सचिव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कर्मचारी पक्ष से शिव गोपाल मिश्रा, एम. राघवैय्या और डॉ. एन. कनैय्या सहित कई प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

 

बैठक के दौरान कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग से जुड़े कई प्रमुख मुद्दे सरकार के समक्ष रखे। इनमें न्यूनतम वेतन निर्धारण, फिटमेंट फैक्टर, वार्षिक वेतन वृद्धि दर, पदोन्नति नीति, विभिन्न भत्तों में संशोधन और पेंशन संबंधी प्रावधान शामिल रहे। कर्मचारी संगठनों ने यह भी मांग की कि आयोग की कार्यवाही के दौरान नियमित संवाद और बैठकें सुनिश्चित की जाएं, ताकि कर्मचारियों के पक्ष को समय-समय पर रखा जा सके।

 

बैठक में संयुक्त परामर्श तंत्र की बैठकों में अनियमितता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कहा कि नियमों के अनुसार प्रत्येक वर्ष तीन बैठकें आयोजित होनी चाहिए, लेकिन पिछले लगभग 60 वर्षों में केवल 49 बैठकें ही आयोजित की गई हैं। इस पर नियमित और समयबद्ध बैठकें कराने की मांग की गई।

 

चिकित्सा सुविधाओं और केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कर्मचारी संगठनों ने मांग की कि चिकित्सा खर्चों की पूरी प्रतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही श्रवण यंत्र, दंत प्रत्यारोपण और कृत्रिम दांत जैसे उपचारों को भी स्वास्थ्य योजना के दायरे में शामिल करने की मांग रखी गई। कैबिनेट सचिव ने इन विषयों पर तीन महीने के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए।

 

पेंशनर्स से जुड़े मुद्दों में कर्मचारी संगठनों ने हर पांच वर्ष में पेंशन पुनरीक्षण की मांग उठाई। साथ ही निश्चित चिकित्सा भत्ता को बढ़ाकर तीन हजार रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव भी रखा गया। पारिवारिक पेंशन व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए संगठनों ने विधवा और आश्रित बहुओं को भी पारिवारिक पेंशन के दायरे में शामिल करने का सुझाव दिया।

 

पुरानी पेंशन योजना को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। कर्मचारी संगठनों ने मांग की कि 22 दिसंबर 2003 से पहले जारी हुई भर्तियों से जुड़े कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए। इस मुद्दे पर कर्मचारी संगठनों ने सरकार से सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा जताई।

 

कई विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया में हो रही देरी पर भी चिंता व्यक्त की गई। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कहा कि कुछ विभागों में पदोन्नति में तीन से पांच वर्ष तक का विलंब हो रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। इस पर कैबिनेट सचिव ने समय पर विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकें कराने के निर्देश देने की बात कही।

 

आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर भी कर्मचारी संगठनों ने सवाल उठाए। संगठनों का कहना था कि कई विभागों में स्थायी नियुक्तियों के स्थान पर आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने रिक्त पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया तेज करने और अनुकंपा नियुक्तियों में निर्धारित पांच प्रतिशत सीमा हटाने की मांग की। इस पर कैबिनेट सचिव ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्तियों को रोका नहीं जा सकता।

← Previous Story Next Story →

 

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें