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ट्रंप की दलील हुई फेल, भारत ने रूस से तेल खरीद पर दिया जवाब

National News: अमेरिका के दावे के बाद सवाल उठता है - क्या भारत सच में रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा? विदेश मंत्रालय ने अब इस मुद्दे पर चौंकाने वाला और नाटकीय जवाब दिया है।
News Desk
News Desk Senior Journalist
16 Oct 2025
01:50 AM
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ट्रंप की दलील हुई फेल, भारत ने रूस से तेल खरीद पर दिया जवाब


>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर भारत ने दो टूक जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरोसा दिलाया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि तेल और गैस का आयात देश के नागरिकों के हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जाता है, न कि किसी बाहरी दबाव में।


>ट्रंप के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ऊर्जा आयात नीति अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप तय करता है। उन्होंने कहा कि भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है और अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के बीच देशवासियों के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।


>रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत तेल और गैस का एक अहम आयातक है। हमारी प्राथमिकता हमेशा भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना रही है। ऊर्जा की स्थिर कीमतें और आपूर्ति की सुरक्षा हमारी नीति के प्रमुख लक्ष्य हैं। इसी के तहत हम अपने ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण कर रहे हैं और बाजार के हिसाब से निर्णय ले रहे हैं।”


>विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि अमेरिका के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की बातचीत लगातार जारी है। प्रवक्ता ने कहा, “पिछले दशक से हम अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ा रहे हैं। मौजूदा अमेरिकी प्रशासन ने भी भारत के साथ इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है और दोनों देशों के बीच इस पर रचनात्मक चर्चा जारी है।”


>दरअसल, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से भारत की रूस से तेल खरीद पर आपत्ति जताते रहे हैं। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। हालांकि भारत पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि वह रूस से तेल की खरीद पूरी तरह राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा के आधार पर जारी रखेगा।


>भारत के इस रुख से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि वैश्विक दबावों के बावजूद भारत अपने आर्थिक और ऊर्जा हितों से समझौता नहीं करेगा।

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