नई दिल्ली, बुधवार: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम का असर वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था पर तुरंत दिखाई देने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा सीज़फायर की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता कम हुई है, जिससे भारतीय रुपया मजबूत हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इसका सीधा असर शेयर बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
बुधवार के शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 50 पैसे मजबूत होकर 92.56 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 93.06 पर बंद हुआ था। मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, यह मजबूती मुख्य रूप से वैश्विक जोखिम में कमी और डॉलर की कमजोरी के कारण आई है।
शेयर बाजार में रिकॉर्ड तेजी, निवेशकों का भरोसा लौटा: सीज़फायर की घोषणा के बाद घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। BSE Sensex 2800 अंकों से अधिक उछलकर 77,144 के स्तर पर पहुंच गया, जो हाल के दिनों की बड़ी तेजी में से एक माना जा रहा है। वहीं Nifty 50 में भी 821 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली पूरी तरह थमी नहीं है, लेकिन सकारात्मक वैश्विक संकेतों ने बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति को बढ़ाया है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमतों में 12 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है और यह करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है। ईरान द्वारा Strait of Hormuz को खोलने की सहमति के बाद तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका काफी हद तक खत्म हो गई है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग माना जाता है।
तेल की कीमतों में इस गिरावट का असर डॉलर इंडेक्स पर भी पड़ा है, जिससे डॉलर कमजोर हुआ और उभरते बाजारों की मुद्राओं, खासकर रुपये को मजबूती मिली।
मजबूत रुपया और सस्ता तेल: आम लोगों के लिए क्या मायने
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित राहत: भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। आयात का भुगतान डॉलर में होने के कारण जब रुपया मजबूत होता है, तो तेल खरीदने की लागत घट जाती है। यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें नीचे बनी रहती हैं, तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी या स्थिरता देखने को मिल सकती है।
महंगाई दर पर पड़ सकता है असर: ईंधन की कीमतों में कमी का व्यापक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। परिवहन लागत घटने से खाद्य पदार्थों, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और अन्य सेवाओं की कीमतों में कमी आ सकती है। इससे खुदरा महंगाई दर पर दबाव कम होने की संभावना रहती है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन सस्ते होने के संकेत: भारत में बिकने वाले अधिकांश स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के पुर्जे आयात किए जाते हैं। रुपया मजबूत होने से इन आयातों की लागत घटती है, जिससे कंपनियों को कीमतें कम करने या बढ़ोतरी रोकने का अवसर मिलता है।
विदेश यात्रा और शिक्षा पर कम होगा खर्च: रुपये की मजबूती का सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है जो विदेश यात्रा करते हैं या विदेश में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। डॉलर के मुकाबले कम रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जिससे कुल खर्च में कमी आती है।
खाद्य तेल और अन्य आयातित वस्तुएं हो सकती हैं सस्ती: भारत पाम ऑयल सहित कई खाद्य तेलों और आवश्यक वस्तुओं का आयात करता है। आयात लागत कम होने से इन उत्पादों की घरेलू कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, जिससे रसोई का बजट संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि युद्धविराम कितने समय तक कायम रहता है और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों का रुझान क्या रहता है। फिलहाल, सीज़फायर के बाद आई स्थिरता ने बाजारों और मुद्रा पर सकारात्मक असर डाला है, जिसके चलते महंगाई पर राहत की उम्मीद जताई जा रही है।
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