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पीएम मोदी के भाषण पर कांग्रेस का विशेषाधिकार नोटिस, लोकसभा में बढ़ा सियासी विवाद

संविधान संशोधन विधेयक की हार के बाद बयान पर आपत्ति, स्पीकर से कार्रवाई की मांग।
Bureau
Bureau Senior Journalist
21 Apr 2026
09:29 PM
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पीएम मोदी के भाषण पर कांग्रेस का विशेषाधिकार नोटिस, लोकसभा में बढ़ा सियासी विवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संबोधन को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस देकर प्रधानमंत्री के बयान पर गंभीर आपत्ति जताई है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को नियम 222 के तहत विशेषाधिकार नोटिस सौंपा। अपने पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के बयान में सांसदों के खिलाफ टिप्पणी की गई, जो संसद की गरिमा के खिलाफ है। 

 

वेणुगोपाल ने लिखा, मैं लोकसभा के नियम 222 के तहत विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे रहा हूं, क्योंकि प्रधानमंत्री ने 18 अप्रैल 2026 को प्रसारित अपने संबोधन में सांसदों पर टिप्पणी की है।  यह विवाद उस समय सामने आया जब सरकार का प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित नहीं हो सका। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण यह विधेयक गिर गया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने लगभग 29 मिनट का संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने विपक्षी दलों पर विधेयक को रोकने का आरोप लगाया और सांसदों के मतदान व्यवहार पर टिप्पणी की। 

 

वेणुगोपाल ने अपने नोटिस में कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के इरादों पर सवाल उठाना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। उन्होंने लिखा, यह मामला अत्यंत गंभीर है, क्योंकि अपने कर्तव्य का पालन कर रहे निर्वाचित प्रतिनिधि पर सवाल उठाना न केवल व्यक्तिगत हमला है, बल्कि संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी सीधा आघात है। उन्होंने स्पीकर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

 

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए वेणुगोपाल के कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा, मेरे वरिष्ठ सहयोगी केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया है, जो लोकसभा में उनके अप्रत्याशित पराजय के बाद दिए गए संबोधन से जुड़ा है।  रमेश ने प्रधानमंत्री के संबोधन की आलोचना करते हुए कहा कि यह राष्ट्र को एकजुट करने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से भरा हुआ था। कांग्रेस का कहना है कि सांसदों के मतदान के पीछे नीयत पर टिप्पणी करना संसदीय परंपराओं के विपरीत है और इससे जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है। वहीं, यह मामला अब लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विचाराधीन है, जिनके पास विशेषाधिकार नोटिस पर आगे की कार्रवाई का अधिकार है।

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