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सुनने-बोलने में थी दिक्कत, अब मुस्कुराकर बोली 'थैंक यू योगी जी', परिवार को मिला नया सहारा

कानपुर की 19 वर्षीय दिव्यांग खुशी के पिता को सीएसआर के तहत मिला निःशुल्क ई-रिक्शा, उपचार और शिक्षा के बाद परिवार की आजीविका को भी मिला सहारा।
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Bureau News Desk
03 Jul 2026
03:43 PM
1 min read
सुनने-बोलने में थी दिक्कत, अब मुस्कुराकर बोली 'थैंक यू योगी जी', परिवार को मिला नया सहारा
कानपुर की दिव्यांग खुशी गुप्ता के पिता को मिला निःशुल्क ई-रिक्शा
हाइलाइट्स
खुशी गुप्ता के पिता को सीएसआर के तहत निःशुल्क ई-रिक्शा मिला।
ई-रिक्शा का पंजीकरण खुशी की मां के नाम पर कराया गया।
खुशी का फरवरी 2026 में कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया था।
वर्तमान में वह विशेष विद्यालय में पढ़ाई कर रही है।

कानपुर की 19 वर्षीय दिव्यांग खुशी गुप्ता, जिसने अपनी समस्याओं को लेकर पिछले वर्ष पैदल लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी, अब उसके परिवार के पुनर्वास की प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण कदम जुड़ गया है। खुशी के उपचार और शिक्षा के बाद अब उसके परिवार की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए उसके पिता कल्लू गुप्ता को निःशुल्क ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया है।

शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने खुशी के पिता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपी। यह वाहन एनआरजे इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड ने अपने सीएसआर फंड के तहत उपलब्ध कराया है। वाहन का पंजीकरण खुशी की मां गीता गुप्ता के नाम पर किया गया है।

खुशी का परिवार लंबे समय से आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा था। उसके पिता कल्लू गुप्ता किराये पर ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। प्रतिदिन होने वाली आय का बड़ा हिस्सा वाहन के किराये में खर्च हो जाता था, जिससे घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था।

हाल ही में सड़क दुर्घटना में पैर में चोट लगने के बाद उनकी आय भी प्रभावित हुई। ऐसे में परिवार के सामने आजीविका का संकट और गहरा गया। प्रशासन के संज्ञान में मामला आने के बाद जिलाधिकारी की पहल पर परिवार को नया ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया, जिससे नियमित आय का साधन सुनिश्चित हो सके।

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खुशी की कहानी उस समय चर्चा में आई थी, जब वह अपनी समस्याएं लेकर कानपुर से पैदल लखनऊ पहुंची थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान उसने अपनी स्थिति बताई, जिसके बाद अधिकारियों को उसके उपचार, शिक्षा और पुनर्वास के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। इसके बाद प्रशासन ने विभिन्न विभागों के समन्वय से उसके इलाज और शिक्षा से जुड़े मामलों पर कार्रवाई शुरू की।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में फरवरी 2026 में खुशी का कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया। लंबे समय तक सुनने और बोलने में असमर्थ रही खुशी अब पहले की तुलना में बेहतर सुन और समझ पा रही है। नियमित स्पीच थेरेपी के बाद उसने बोलना भी शुरू कर दिया है।

उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से लखनऊ के मोहान रोड स्थित समेकित विशेष माध्यमिक (आवासीय) विद्यालय में कक्षा 9 में उसका प्रवेश कराया गया।

प्रशासन के अनुसार उपचार और शिक्षा के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में यह अगला कदम है। नया ई-रिक्शा मिलने से परिवार को नियमित आय का स्थायी साधन उपलब्ध होने की उम्मीद है।

ई-रिक्शा मिलने के बाद खुशी ने मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, "थैंक यू योगी जी।" उसकी मां गीता गुप्ता ने कहा, "पहले बेटी के इलाज की चिंता थी, फिर उसकी पढ़ाई की। इन समस्याओं के समाधान के साथ-साथ अब रोजी-रोटी की चिंता भी खत्म हो गई है। योगी जी के आशीर्वाद और प्रशासन के सहयोग से हमारे परिवार को नया जीवन मिला है।"

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप खुशी के पुनर्वास में किसी प्रकार की कमी न रहे, इसके लिए उपचार, शिक्षा और अब परिवार की आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य केवल सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनने में सहयोग देना है।

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