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क्या अब ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ बोलना अपराध नहीं?

क्या सिर्फ 'पाकिस्तान जिंदाबाद' कहना अपराध है? इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने शुरू की नई बहस
News Desk
News Desk Senior Journalist
12 Jul 2025
03:45 AM
1 min read
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क्या अब ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ बोलना अपराध नहीं?


>सोशल मीडिया पर किसी देश के प्रति समर्थन जताना क्या सचमुच अपराध है? इस सवाल पर विचार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने एक 18 वर्षीय छात्र रियाज को जमानत देते हुए कहा कि अगर पोस्ट में भारत का कोई संदर्भ नहीं है और सिर्फ पाकिस्तान के समर्थन की बात है, तो उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत प्रथम दृष्टया अपराध नहीं माना जा सकता।


>यह फैसला न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने सुनाया, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित "इमरान प्रतापगढ़ी बनाम गुजरात राज्य" मामले का हवाला दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारतीय संविधान का मूलभूत अधिकार है, और इससे समझौता नहीं किया जा सकता।


>इंस्टाग्राम पोस्ट बना गिरफ्तारी की वजह


>मामला तब उठा जब छात्र रियाज ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया: “चाहे जो हो जाए, सपोर्ट तो पाकिस्तान का ही करेंगे।


>इस पोस्ट के आधार पर पुलिस ने उसे गंभीर धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। रियाज 25 मई से हिरासत में था। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 और अन्य धाराएं लगाई गई थीं।


>कोर्ट की टिप्पणी: “सिर्फ समर्थन पर्याप्त नहीं”


>कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक कोई पोस्ट भारत की संप्रभुता, एकता या अखंडता को सीधा खतरा नहीं देती, उसे आपराधिक कृत्य की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी की कि धारा 152 में सख्त सज़ा का प्रावधान है, इसलिए उसे लागू करते समय अत्यधिक सतर्कता की जरूरत है।


>जांच प्रक्रिया में चूक


>कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि धारा 173(3) के तहत प्रारंभिक जांच अनिवार्य थी, जो इस केस में नहीं की गई। चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, और वह नाबालिग के क़रीब है — ऐसे में जमानत देना न्यायोचित है।


>चेतावनी के साथ मिली ज़मानत


>कोर्ट ने रियाज को ज़मानत देते हुए भविष्य में किसी भी भड़काऊ या आपत्तिजनक पोस्ट से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है। यह फैसला सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने वाले युवाओं के लिए एक संदेश भी है और चेतावनी भी

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