>उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को राजभवन, लखनऊ में कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएँ विभाग द्वारा समयपूर्व रिहाई से संबंधित प्रस्तावित शासनादेश पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में नीति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
>बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों ने प्रस्तावित शासनादेश के प्रावधानों, उद्देश्यों, पात्रता मानदंड और प्रक्रिया पर प्रस्तुतीकरण दिया। समयपूर्व रिहाई नीति के सामाजिक प्रभावों और सुधारात्मक उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल ने बिंदुवार समीक्षा की और आवश्यक सुझाव दिए।
>राज्यपाल ने निर्देश दिया कि समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया पारदर्शी, न्यायसंगत और सुधार के उद्देश्य के अनुरूप होनी चाहिए, जिससे बंदियों के हित सुरक्षित रहें। उन्होंने कारागारों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं जैसे की स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा।
>राज्यपाल ने नेशनल फॉरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय रक्षा शक्ति महाविद्यालय और इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के अपने हालिया दौरे का अनुभव साझा करते हुए जांच प्रक्रियाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फॉरेंसिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग का उल्लेख किया। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे संस्थानों के भ्रमण के लिए प्रेरित किया ताकि नवीन तकनीकों को कारागार व्यवस्था में अपनाया जा सके।
>उन्होंने जेल परिसरों में उपजाई जाने वाली शाक-सब्जियों के उपयोग को आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों की मध्यान्ह भोजन योजना से जोड़ने की संभावनाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए। साथ ही बंदियों के आय सृजन हेतु कौशल प्रशिक्षण और उत्पादक गतिविधियों पर जोर दिया।
>महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे छोटे बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल को प्राथमिकता देने तथा विभागों के बीच समन्वय से समस्याओं के समाधान के निर्देश भी दिए गए। आकस्मिक निरीक्षण और मानकों के कड़ाई से पालन पर भी बल दिया गया। बैठक में दिए गए निर्देशों के आधार पर कारागार सुधारों और समयपूर्व रिहाई नीति को और प्रभावी बनाने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
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