>उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। जहां सरकार ने उनके स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, वहीं भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इस पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। टिकैत ने दावा किया है कि धनखड़ से इस्तीफा दिलवाया गया, क्योंकि उन्होंने किसानों और गांवों की समस्याओं की आवाज़ बुलंद की थी।
>राकेश टिकैत ने कहा कि उपराष्ट्रपति ने स्वयं इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "धनखड़ साहब ने किसानों की फसल, गांवों की दुर्दशा और किसानों के मुद्दों पर खुलकर बात की, जो शायद सत्ता को रास नहीं आई।"
>उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इस्तीफे की वजह वाकई स्वास्थ्य कारण हैं, तो मेडिकल रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। टिकैत ने यह भी कहा कि देश के गांवों में यही चर्चा है कि जो व्यक्ति किसानों के लिए बोलता था, उसे ही पद से हटा दिया गया।
>टिकैत ने आगे कहा कि “वह व्यक्ति जो सत्ता के गलियारों में किसानों की तरफ से बोलता था, वही अब सत्ता में नहीं है। एक ही आवाज़ थी, वो भी खामोश कर दी गई।” उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया और कहा कि इससे किसानों का विश्वास राजनीतिक व्यवस्था से और भी कमजोर होगा।
>जब राकेश टिकैत से कांवड़ यात्रा को लेकर हो रही बयानबाजी पर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि “अपराधी का कोई धर्म नहीं होता। कोई किसी पार्टी से नहीं होता, जिसका मकसद गलत है, वो गलत ही रहेगा।” साथ ही उन्होंने मुज़फ्फरनगर पुलिस और खुफिया एजेंसियों की सजगता की सराहना करते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा शांतिपूर्वक और आस्था के अनुरूप संचालित हो रही है।
>धनखड़ के इस्तीफे के बाद विपक्षी दल भी सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस्तीफे की आड़ में कुछ और सच्चाई छिपाई जा रही है। ऐसे में टिकैत के बयान ने इस पूरे मामले को और भी गरमा दिया है और अब जनता जानना चाहती है – क्या किसानों की आवाज़ उठाना सत्ता के लिए खतरा बन गया है?
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