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एसजीपीजीआईएमएस में ‘नेत्र मंथन’, यूपी में कॉर्नियल दान पर रणनीति तैयार

लखनऊ के एसजीपीजीआईएमएस में आयोजित ‘नेत्र मंथन’ सत्र में यूपी में कॉर्नियल दान और प्रत्यारोपण की स्थिति पर चर्चा। राज्य में प्रतिवर्ष 1 लाख से अधिक कॉर्निया की जरूरत पर जोर।
Bureau 28 Feb 2026, 08:07 PM 1 min read
एसजीपीजीआईएमएस में ‘नेत्र मंथन’, यूपी में कॉर्नियल दान पर रणनीति तैयार

उत्तर प्रदेश में कॉर्नियल दान और प्रत्यारोपण की स्थिति पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए 28 फरवरी 2026 को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ में “नेत्र मंथन” राज्य स्तरीय सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन अस्पताल प्रशासन विभाग और नेत्र विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023–24 में देशभर में 49,315 कॉर्निया प्राप्त हुए, जिनमें से 27,394 प्रत्यारोपण में उपयोग किए गए। विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष कम से कम 1,00,000 कॉर्निया की आवश्यकता है, जबकि कॉर्नियल अंधता से पीड़ित लोगों की संख्या 10 से 12 लाख आंकी गई है।

 

सत्र में दाता पहचान प्रणाली सुदृढ़ करने, आई बैंक नेटवर्क मजबूत करने, डिजिटल ट्रैकिंग, प्रत्यारोपण समन्वयकों के प्रशिक्षण और जन-जागरूकता अभियान पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि कॉर्नियल अंधता के अधिकांश मामलों का समयबद्ध दान और प्रभावी प्रत्यारोपण से उपचार संभव है।

 

कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा विभाग, नोट्टो, एसजीपीजीआईएमएस और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र में “फ्रॉम होप टू हीलिंग: अ प्रैक्टिकल गाइड टू ट्रांसप्लांट सिस्टम्स इन इंडिया” पुस्तक का विमोचन भी किया गया। सत्र का समापन राज्य में नेत्रदान की संस्कृति को बढ़ावा देने और कॉर्निया प्राप्ति एवं प्रत्यारोपण की दक्षता बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

 

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