>अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए उच्च टैरिफ के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। मंगलवार को S&P Global Ratings ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखी। रेटिंग एजेंसी ने मजबूत घरेलू मांग और मोटे तौर पर अनुकूल मानसून को इसके पीछे मुख्य कारण बताया।
>आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, ‘मेक इन इंडिया’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं और विभिन्न औद्योगिक सेक्टर पर अमेरिकी हाई टैरिफ के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही थी। लेकिन S&P की ताजा रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी टैरिफ का भारत की जीडीपी वृद्धि पर कोई खास असर नहीं होगा।
>S&P ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की संभावना है। एजेंसी ने मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान को घटाकर 3.2 प्रतिशत कर दिया है। अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP वृद्धि दर 7.8% रही थी, जो घरेलू मांग और सरकारी निवेश की मजबूती को दर्शाती है।
>मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति:
S&P ने बताया कि खाद्य मुद्रास्फीति में कमी से पूरे वर्ष मुद्रास्फीति नियंत्रित रहने की संभावना है, जिससे मौद्रिक नीति में और समायोजन की गुंजाइश बनेगी। एजेंसी का मानना है कि RBI इस वित्त वर्ष में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है।
>एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर प्रभाव:
एजेंसी ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव विभिन्न एशियाई देशों के निर्यात और क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि चीन ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि दक्षिण-पूर्व एशियाई उभरते बाजारों पर अमेरिकी शुल्क का असर थोड़ा कमजोर रहा है। भारत पर इसका असर अपेक्षाकृत कम पड़ा है और अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर अपने अनुमान के अनुसार स्थिर बनी हुई है।
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