>भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों में जल्द ही एक नया मोड़ आने वाला है। दोनों देश एक “अर्ली हार्वेस्ट डील” यानी प्रारंभिक व्यापार समझौते की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जो अगले महीने तक घोषित किया जा सकता है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य एक-दूसरे के बाज़ार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना है और व्यापार में बाधा बन रही टैरिफ (आयात शुल्क) व गैर-टैरिफ अवरोधों को हटाना है।
>यह समझौता दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआत साबित हो सकता है। इसमें मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल और कृषि उत्पाद जैसे ‘लो-हैंगिंग फ्रूट्स’ को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे भारत अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पाद जैसे मक्का, बादाम, सोयाबीन, पिस्ता, पोल्ट्री और मांस को सीमित मात्रा में अनुमति दे सकता है, जबकि जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध यथावत रहेगा। दूसरी ओर अमेरिका भारत के श्रम-प्रधान उत्पादों जैसे वस्त्र, रत्न एवं आभूषणों को अधिक बाजार उपलब्ध कराएगा।
>अमेरिका ने भारत पर 10% आधारभूत टैरिफ के अलावा एक और 16% का अतिरिक्त शुल्क लगाने की योजना बनाई थी, जो 9 जुलाई से लागू होना था। लेकिन इस प्रस्तावित समझौते से यह अतिरिक्त शुल्क टल सकता है। दोनों पक्षों के बीच चल रही गहन वार्ताओं से संकेत मिल रहे हैं कि 90% से अधिक वस्तुओं को ड्यूटी-फ्री पहुंच मिल सकती है।
>यह समझौता भारत की व्यापार नीति में ‘बदलाव की मंशा’ को दर्शाता है, जो वैश्विक मंच पर सहयोग और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। इसके साथ ही यह अमेरिका को भी यह संदेश देगा कि भारत वैश्विक व्यापार में रचनात्मक भागीदारी के लिए तैयार है।
>केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा इस वार्ता को गति दे रही है। उन्होंने वॉशिंगटन में अमेरिकी वाणिज्य सचिव होवार्ड लुटनिक और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीयर से मुलाकात की, जिससे समझौते को अंतिम रूप देने की संभावना और प्रबल हुई है।
>यह प्रारंभिक समझौता सितंबर-अक्टूबर 2025 तक एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) की पहली किस्त का आधार बनेगा, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कर चुके हैं।
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