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टैक्स का गणित बदला: 1 अप्रैल 2026 से बिना सैलरी बढ़े भी बढ़ेगी इनकम

आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा नया कानून; भत्तों में बढ़ोतरी, 12.75 लाख तक टैक्स शून्य।
Bureau
Bureau Senior Journalist
31 Mar 2026
08:53 PM
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टैक्स का गणित बदला: 1 अप्रैल 2026 से बिना सैलरी बढ़े भी बढ़ेगी इनकम

देश में आयकर व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू होगा, जिससे 64 साल पुराना आयकर अधिनियम 1961 समाप्त हो जाएगा। नए प्रावधानों के तहत टैक्स सिस्टम को सरल बनाने के साथ-साथ मिडिल क्लास को राहत देने के उद्देश्य से कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर सैलरी और टेक-होम इनकम पर पड़ेगा।

 

भत्तों में बढ़ोतरी से बढ़ेगी बचत - नए कानून के तहत बच्चों के एजुकेशन अलाउंस को 100 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। वहीं हॉस्टल अलाउंस 300 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इन बदलावों से कर्मचारियों को टैक्स बचत का वास्तविक लाभ मिलने की संभावना है।

 

12.75 लाख रुपये तक आय पर टैक्स नहीं - सरकार ने सेक्शन 87A के तहत 12 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स शून्य रखा है। इसके अलावा 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी जारी रहेगा। इस प्रकार 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कर देनदारी समाप्त हो जाएगी।

 

जटिल कानून की जगह सरल संरचना - पुराने आयकर कानून में 800 से अधिक धाराएं थीं, जिन्हें घटाकर लगभग 536 कर दिया गया है। इसका उद्देश्य टैक्स प्रणाली को सरल बनाना और विवादों को कम करना है, ताकि आम व्यक्ति भी बिना विशेषज्ञ सहायता के इसे समझ सके।

 

फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर की उलझन खत्म - नए प्रावधानों के अनुसार अब “फाइनेंशियल ईयर” और “असेसमेंट ईयर” की जगह सीधे “Tax Year” की अवधारणा लागू होगी। उदाहरण के तौर पर अब “Tax Year 2026-27” के नाम से ही आय और टैक्स की गणना की जाएगी और उसी आधार पर आयकर रिटर्न दाखिल होगा।

 

HRA में बढ़ी छूट, नए शहर शामिल - बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को मेट्रो शहरों की सूची में शामिल किया गया है। इससे इन शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों को हाउस रेंट अलाउंस में अधिक छूट मिलेगी।

 

किराए पर पारदर्शिता के लिए सख्ती - यदि कोई कर्मचारी सालाना 1 लाख रुपये से अधिक किराया देता है, तो अब मकान मालिक का PAN देना अनिवार्य होगा। साथ ही मकान मालिक के साथ संबंध की जानकारी भी देनी होगी, जिससे फर्जी रसीदों के जरिए टैक्स बचाने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके।

 

मेडिकल लोन पर बढ़ी छूट - कंपनी द्वारा दिए जाने वाले चिकित्सा ऋण पर टैक्स छूट की सीमा 20,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है। इससे गंभीर बीमारी के समय आर्थिक राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी।

 

मील वाउचर पर राहत - ऑफिस में मिलने वाले भोजन या मील वाउचर पर टैक्स छूट सीमा 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दी गई है। इससे सालाना आधार पर कर्मचारियों को अतिरिक्त टैक्स बचत का लाभ मिलेगा।

 

नए फॉर्म और डिजिटल प्रक्रिया - अब फॉर्म-16 की जगह फॉर्म-130 लागू किया गया है। अन्य टैक्स फॉर्म में भी बदलाव किए गए हैं, जिससे टैक्स से जुड़ी जानकारी अधिक स्पष्ट और डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होगी।

 

सीनियर सिटीजन के लिए सरल प्रक्रिया - 15G और 15H फॉर्म को मिलाकर एक नया संयुक्त फॉर्म तैयार किया गया है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को प्रक्रिया में आसानी होगी।

 

 

वर्तमान वित्त वर्ष पर पुराना कानून लागू - स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में भरे जाने वाले आयकर रिटर्न पुराने कानून के अनुसार ही होंगे। नया आयकर अधिनियम 1 अप्रैल 2026 के बाद अर्जित आय पर लागू होगा।

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