>साइबर अपराधियों ने एक नई चाल से नोएडा की एक महिला को ठग लिया। महिला को एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से कॉल आया और उसे बताया गया कि उसके मोबाइल नंबर पर 17 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें एक एफआईआर अवैध विज्ञापन और उत्पीड़न से जुड़ी है। डर और भ्रम की स्थिति में, महिला से ₹14 लाख की ठगी कर ली गई। पुलिस ने सोमवार को साइबर क्राइम ब्रांच थाने में मामला दर्ज किया है।
>पीड़िता, जो सेक्टर 50 स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, ने 3 जनवरी को यह कॉल प्राप्त किया और उसी दिन साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। FIR में कहा गया है कि कॉलर ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी का प्रतिनिधि बताया और धमकाया कि अगर उसने दो घंटे के भीतर पुलिस क्लैरिफिकेशन पत्र नहीं जमा किया तो उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया जाएगा और वह भारत में किसी भी नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं कर पाएगी।
>ठग ने ‘मदद’ के नाम पर कॉल को मुंबई पुलिस अधिकारी के रूप में प्रस्तुत एक अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर कर दिया। महिला ने अपने बयान में कहा, “मैं रो रही थी, कांप रही थी, विनती कर रही थी… मैंने कहा कि मैं कभी मुंबई गई ही नहीं… उन्होंने मुझे मानसिक रूप से डराया, अपमानित किया और भावनात्मक रूप से कोना पकड़ लिया।”
>इस डरावनी बातचीत के बाद, घायल होने के बावजूद महिला बैंक गई और ₹14 लाख ट्रांसफर कर दिए। बाद में, जब उसने अपनी मां को सारी बात बताई, तब जाकर उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है।
>पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर की गई थी। जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
>साइबर क्राइम ब्रांच के स्टेशन हाउस ऑफिसर रंजीत कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है और आम जनता को ऐसे मामलों में सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
जनता के लिए जरूरी चेतावनी:
>इस तरह की कॉल आने पर घबराएं नहीं। किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने से पहले पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से पुष्टि करें। डिजिटल गिरफ्तारी, अकाउंट ब्लॉक या कानूनी कार्रवाई की धमकी आम तौर पर ठगी के लिए होती है।
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